भारतीय किसान गरीब है। उनकी गरीबी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। किसान को दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं हो पाता। उन्हें मोटे कपड़े का एक टुकड़ा नसीब नही हो पाता है। वह अपने बच्चों को शिक्षा भी नहीं दे पाते। वह अपने बेटे और बेटियों का ठीक पोशाक तक खरीद कर नहीं दे पाते। वह अपनी पत्नी को गहने पहऩऩे का सुख नहीं दे पाते। किसान की पत्नी कपड़े के कुछ टुकड़े के साथ प्रबंधित करने के लिए है। वह भी घर पर और क्षेत्र में काम करती है। वह गौशाला साफ करती, गाय के गोबर बनाकर दिवारो पर चिपकाती और उन्हें धूप में सूखाती। वह गीले मानसून के महीनों के दौरान ईंधन के रूप में उपयोग होता। भारतीय किसान को गांव के दलालों द्वारा परेशान किया जाता है। वह साहूकार और कर संग्राहकों से परेशान रहते इसलिए वह अपने ही उपज का आनंद नहीं कर पाते हैं। भारतीय किसान के पास उपयुक्त निवास करने के लिए घर नहीं होता। वह भूसे फूस की झोपड़ी में रहते है। उसका कमरा बहुत छोटा है और डार होता। जबकी बड़े किसानों का बहुत सुधार हुआ है, छोटे भूमि धारकों और सीमांत किसानों की हालत अब भी संतोषजनक से भी कम है।
भारत देश एक गांवों का देश है, और सभी ग्रामीण समुदायों में अधिक मात्रा में कृषि कार्य किया जाता है इसी लिए भारत को भारत कृषि प्रधान देश की संज्ञा भी मिली हुई है। लगभग 70% भारतीय लोग किसान हैं। वे भारत देश के रीढ़ की हड्डी के समान है। खाद्य फसलों और तिलहन का उत्पादन करते हैं। वे वाणिज्यिक फसलों के उत्पादक है। वे हमारे उद्योगों के लिए कुछ कच्चे माल का उत्पादन करते इसलिए वे हमारे राष्ट्र के जीवन रक्त है। भारत अपने लोगों की लगभग 60 % कृषि पर प्रत्यक्ष या पपरोक्ष रूप से निर्भर भारतीय किसान पूरे दिन और रात काम करते है। वह बीज बोते है और रात में फसलों पर नजर रखते भी है। वह आवारा मवेशियों के खिलाफ फसलों की रखवाली करते। वह अपने बैलों का ख्याल रखते है। आजकल, कई राज्यों में बैलों की मदद से खेती करने कि संख्या लगभग खत्म हो गई हैं और ट्रैक्टर की मदद् से खेती कि जाती है। उनकी पत्नीय़ॉ और बच्चों उनके काम में उनकी मदद करते है।
कुछ किसान दूध का व्यवसाय करते है । उसी से अपने घर चलते है । कही कही तो आज भी 10 से 12 साल के बच्चें भी मजदूरी करते है ! स्कूल तो कभी कभी जाते है ।
ऐसी है किसानों की ओर उनके परिवारों की हालत
भारतीय किसान गरीब है। उनकी गरीबी पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। किसान को दो वक्त का खाना भी नसीब नहीं नहीं हो पाता। उन्हें मोटे कपड़े का एक टुकड़ा नसीब नही हो प पाता है। वह अपने बच्चों को शिक्षा भी नहीं दे पाते। वह अपने बेटे और बेटियों का ठीक पोशाक तक खरीद कर नहीं दे पाते। वह अपनी पत नी नी ो गहन गहन पहऩऩ पहऩऩ सुख सुख सुख सुख नहीं नहीं प प प।। किसान की पत्नी कपड़े के कुछ टुकड़े के साथ प्रबंधित करने के लिए है। वह भी घ प प औ औ म म म म म म।।।।। वह गौशाला साफ करती, गाय के गोबर बनाकर दिवारो पर चिपकाती और उन्हें धूप में सूखाती। वह गीले कानसून के महीनों के दौरान ईंधन के रूप में उपयोग होता। भारतीय किसान को गांव के दलालों द्वारा परेशान किया जाता है। वह स हू स औ क क क क क क क क क क क क क क क क क क क क क क क क भारतीय किसान के पास उपयुक्त निवास करने के लिए घर नहीं होता। वह भूसे फूस की झोपड़ी में रहते है। बहुतका कमरा बहुत छोटा है और डार होता। जबकी बड़े किसानों का बहुत सुधार हुआ है, छोटे भूमि धारकों और सीमांत किसानों की हालत अब भी संतोषजनक से से भी कम है।।
भारत देश एक गांवों का देश है, और सभी ग्रामीण समुदायों में अधिक मात्रा में कृषि कार्ज किया जाता है इसी भ त ो ो ो ो ो ो ो ो ो लगभग 70% भारतीय लोग किसान हैं। वे भारत देश के रीढ़ की हड्डी के समान है। खाद्य फसलों और तिलहन का उत्पादन करते हैं। वे वाणिज्यिक फसलों के उत्पादक है। वे हमारे उद्योगों के लिए कुछ कच्चे माल का उत्पादन करते इसलिए वे हमारे राष्ट्र के जीवन रक्त है।। लगभगारत पे लोगों की लगभग 60% कृषि पर प्रत्यक्ष या पपरोक्ष रूप से निर्भर भारतीय किसान पूरे दिन और रात काम काकत वह बीज बोत है है औ औ त त नज नज नज नज।।।।।। वह आवारा मवेशियों के खिलाफ फसलों की रखवाली करते। वह अपने बैलों का ख्याल रखते है। लकल, कई राज्यों में बैलों की मदद से खेख करिे कि संख्या लगभग खत्म हो ट ट ट ट ट ट ट ी ख ि ि ि ि।।।।। उनकी पत्नीय़ॉ और बच्चों उनके काम में उनकी मदद करते है।
कुछ किसान दूध का व्यवसाय करते है। उसी से अपने घर चलते है। कही कही तो आज भी 10 12े 12 साल के बच्चें भी मजदूरी करते है! स्कूल तो कभी कभी जाते है।
ऐसी है किसानों की ओर उनके परिवारों की हालत
farmer and problem so help farmer